Way to know about
Friday, 23 January 2015
Shayari: चाहे गर्दन काट लो या ढाओ लाख सितम
चाहे
गर्दन
काट
लो
या
ढाओ
लाख
सितम
हम
ने
भी
खाई
है
भारत
माँ
की
कसम
शेर
हैं
हिंदुस्तानी
,
कोई
गिदर
नहीं
जो
डर
जाऊं
कल
भी
आज़ाद
था
,
आज
भी
आजाद
है
,
हमेशा
रहेगा
ये
वतन
...
।
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment