ज़िद न करूँ तो बेखुदी कैसी है
कुछ गलत नहीं तो बदी कैसी है
कहते हो प्यार की तरह प्यार करो
मस्ती नहीं तो दिल्लगी कैसी है
गुरुर में लुट जाते हैं इन्सान की इमान
इमान गर नहीं तो बंदगी कैसी है
मेहनत कर मंजिल खुद बखुद मिल जाएगी
बिन मेहनत के मंजिल में ख़ुशी कैसी है
गम किस के जिंदगी में नहीं "जहाँगीर"
कुछ गलत नहीं तो बदी कैसी है
कहते हो प्यार की तरह प्यार करो
मस्ती नहीं तो दिल्लगी कैसी है
गुरुर में लुट जाते हैं इन्सान की इमान
इमान गर नहीं तो बंदगी कैसी है
मेहनत कर मंजिल खुद बखुद मिल जाएगी
बिन मेहनत के मंजिल में ख़ुशी कैसी है
गम किस के जिंदगी में नहीं "जहाँगीर"
गम गर नहीं तो जिंदगी कैसी है ...!!

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